मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के मार्गदर्शन में साइन लैंग्वेज वीक के अवसर पर संचालित विशेष कार्यक्रम “अनुगूंज से उद्घोष” के अंतर्गत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मंदसौर द्वारा मंगलवार को एडीआर सेंटर भवन, मंदसौर में श्रवण एवं वाक् बाधित बच्चों एवं व्यक्तियों के लिए विशेष जागरूकता एवं क्षमता-वर्धन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए श्रवण एवं वाक् बाधित व्यक्तियों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम का उद्देश्य श्रवण एवं वाक् बाधित व्यक्तियों को उनके विधिक अधिकारों, न्याय तक पहुंच, निःशुल्क विधिक सहायता, शिक्षा, रोजगार एवं करियर के अवसरों, डिजिटल सुरक्षा तथा हिंसा एवं शोषण से बचाव के संबंध में सरल एवं सुलभ माध्यम से जानकारी प्रदान करना रहा।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 तथा दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अंतर्गत प्राप्त अधिकारों एवं संरक्षणात्मक प्रावधानों की जानकारी दी गई। साथ ही जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली निःशुल्क विधिक सेवाओं तथा विधिक सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया से भी अवगत कराया गया।
कार्यक्रम में भावनात्मक सशक्तिकरण, तनाव प्रबंधन, आत्मविश्वास, संवाद कौशल एवं सामाजिक चुनौतियों से निपटने के विषयों पर भी मार्गदर्शन प्रदान किया गया। श्रवण एवं वाक् बाधित बच्चों की प्रतिभा एवं रुचियों की पहचान, कला एवं रचनात्मक गतिविधियों, खेल तथा विभिन्न वैकल्पिक करियर अवसरों के संबंध में भी चर्चा की गई।
इस अवसर पर बच्चों एवं प्रतिभागियों को हिंसा, दुर्व्यवहार, शोषण एवं लैंगिक अपराधों से सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया। साइन लैंग्वेज एवं दृश्य माध्यमों के माध्यम से संभावित जोखिमों की पहचान, सुरक्षित व्यवहार तथा आवश्यकता पड़ने पर सहायता प्राप्त करने के तरीकों की जानकारी दी गई।
इसके अतिरिक्त डिजिटल एवं साइबर सुरक्षा के अंतर्गत सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग, साइबर बुलिंग, ऑनलाइन धोखाधड़ी एवं अन्य डिजिटल जोखिमों से बचाव तथा उपलब्ध शिकायत एवं सहायता तंत्र के संबंध में भी जागरूक किया गया।
कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि न्याय तक पहुंच प्रत्येक व्यक्ति का अधिकार है और दिव्यांगजन को भी समान रूप से विधिक संरक्षण एवं सहायता प्राप्त होनी चाहिए। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा दिव्यांगजनों के लिए विधिक सेवाओं को अधिक सुलभ, सहज एवं समावेशी बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि किसी भी व्यक्ति को अपनी दिव्यांगता के कारण न्याय प्राप्त करने में बाधा का सामना न करना पड़े



